Dec 21, 2011 - Poems in Hindi    No Comments

जिंदगी एक सफर |

मैं फिर चल पड़ा आज, यूँ ही किसी सफर पर |
जाना कहाँ था ये थी नहीं खबर |

हमसफ़र मिला चलते चलते, साथ चला कुछ पल |
फिर एक मोड पर बिछड गयी डगर |

मैं फिर चल पड़ा आज, यूँ ही किसी सफर पर |
जाना कहाँ था ये थी नहीं खबर |

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